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Monday, July 2, 2012

Horned


मुल्ला नसीरुद्दीन जैसे लोग दुनिया के हर कोने में मिलते है फर्क इतना होता होगा कोई कुछ ज्यादा ही  नसीरुद्दीन होते है | वैसे तो  नसीरुद्दीन हमारे समझदारी से जवाब दिया करते थे , चालाकी से, विकट उनसे कुछ बीसी ही ठहरे |
एक बार ज़नाब ने अपनी बाइक की चाभी बाईक में ही भूल गए | हमने देख लिया और चाभी चुपके से रख लिया | ऑफिस के अन्दर मैंने पुछा  - "विकट , भाई मुझे ज़रा काम है , तेरी बाइक मिलेगी ?"
वो डरते हुए बोला - "मैंने तो आज बाईक ली ही नहीं " शिष्ट था आज वो |
मैंने बोला - "चल मज़ाक मत कर , ज़रूरी काम है "
"मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूँ "
"अच्छा, फिर ऑफिस कैसे आया " मेरे सवाल से सकपे में आ गया |
"बस से, या Cab  से आया होगा, तुम्हे उससे क्या ?" शिष्टाचार भूलने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा |
तभी मैंने बोला- "तेरी बाईक देखी मैंने आज बाहर , हौर्न भी बज रहा था |"
उसने कहा - "तुम  मेरी बात पे भरोसा करोगे या हौर्न पर "
"हौर्न पर "

थोड़ी देर बाद वो वापस आया और बोला - "यार मेरी  बाईक  की चाभी खो गयी है , अब मैं क्या करूँ "
"क्यूँ हौर्न नहीं बजा तेरा उस वक़्त जब मैं तेरे से मदद मांग रहा था "


Thursday, June 28, 2012

Kabootar

खाना खाने का भी एक ढंग होता  है , देखते है कोई एक हाथ से खाता है तो कोई दो हाथों से | मैंने बहुतों को देखा है , कुछ करीने से खाते है तो कुछ घिनौने से | बचपन में माँ डांटा करती थी , सर पर हाथ रख कर नहीं खाना चाहिए , मनहूसियत  बसती है | बहुतों को छुरी- कांटे से खाने में न तो मज़ा आता है ना ही तृप्ति मिलती ही | एक दिन ऐसे ही ऑफिस कैफेटेरिया में हमसब बैठ कर खाना खा रहे थे , विकट भी साथ था | हमेशा की तरह सबसे बड़ा थाली भर कर बैठ गया | थोड़ी देर बाद हमने देखा की , उसने अपना बायाँ हाथ कान पर रख, दुसरे हाथ से खा रहा था | नज़ारा तो हंसनीय था ही , उसको और मजेदार बनाने के लिए मैंने पुछा - "क्या हुआ , ऐसे क्यूँ खा रहा है "?

इसके पहले विकट कुछ बोलता , हमारे मित्र ने कहा -"यह कबूतर है , इसीलिए "| "एक हाथ से अपनी इज्ज़त बचा रहा है |"
गौर कीजियेगा - हाल फिलहाल में एक बहुचर्चित सिनेमा आई है , गैंग्स ऑफ़ वास्सेपुर , जिसका बहुत ही मशहूर डायलोग है -" ये वासेपुर है , यहाँ कबूतर भी एक्के पंख से उड़ता है और दुसरे से अपना इज्ज़त बचाता है "
जाहिर है की यह डायलोग यहाँ फिट बैठता है |

मैंने आगे कहा - "अच्छा तो तुम्हारी इज्ज़त तुम्हारी कान है "
विकट शर्माते हुए कान खुजाने लगा |

Friday, June 22, 2012

Gym Partner

घूरना किसे कहते है , लड़कियों से पूछना चाहिए या लड़कों से | मेरे ख्याल से लड़कियों से , आखिर उन्हें सब पता होता है कौन, कब से और कहाँ से घूर रहा है | ठीक वैसे ही जैसे लोहे का स्वाद लोहार से नहीं , बल्कि उस घोड़े से पूछना चाहिए जिसके मुंह में लगाम है | विकट का तो लगाम जैसे सोने के बर्तन में मिट्टी | कॉफे कॉर्नर में बैठ कर लड़कियों को घूरते हुए उम्मींद करता है कोई शायद इसे देखकर इसकी दुल्हन बन जाये |  उम्मींद  पे तो दुनिया कायम है , और विकट इस बात का जीता जागता सबूत है | कुछ महीनो के बाद एक लड़की जो पहले मोटी थी , चाय पीने जब कैफेटेरिया में आई तो विकट हैरान होगया , लड़कियां भी वजन घटाने की होड़ में शायाद आगे ही होती है | खाना पीना छोड़ देना और गर्व से diet करना , इनके फितरत में होता है |

विकट पिछले कई महीने से gym जाने की कोशिश कर रहा है  |  वैसे  छह महीने के पैसे जमा है , पर Gym के अंदर पैर छह दिन भी नहीं गए होगे , भाईसाहब ने इरादा बदल दिया | जुम्बा डांस try करने के बाद , किसी ने ज्ञान दे दिया की सही खान-पान से वज़न कम किया जा सकता है | दो दिन में वज़न कम नहीं हुआ तो , जुडो कराटे आजमाने का भी सोच डाला | किसी और को पतले होते देख दिल भारी हो जाता है | इसी भरे दिल से विकट ने कहा - "यह किसके साथ Gym जाती है , देखो कितने पतली हो गई है ?"
हमारी हँसी रुकी नहीं , समझ में भी नहीं आ रहा था की विकट की सकपकाहट देखें या लड़की की पतली काया | हमने विकट की तरफ ध्यान दिया - आख़िरकार मनोरंजन तो इधर है |
हमने पुछा - "किस  Gym में जाना ज्यादा important है? या किसके साथ जाना ?" उसने जवाब दिया - "देखो , मैंने तो नंबर १ Gym  join किया पर मेरा वेट कम नहीं हुआ इसका मतलब अगर मैं किसी  लड़की के साथ Gym जाता तो शायद मैं आज six -पैक  रखता और तुम लोग देखते रह जाते "

मैंने कहा - "सही बोलते हो , यह भी किसी लड़की के साथ गयी होगी |"

दुसरे मित्र ने कहा - "तुम्हे लड़की कहाँ  मिलेगी "
"पता नहीं , मैं भी इसी कोशिश में पतला हुआ जा रहा हूँ !"

  

Thursday, June 14, 2012

Headphone and Common Cold

आज विकट को सर्दी लगी है , ऑफिस के मीटिंग रूम  में छींकते हुए बैठा है सुबह से |
कान पर हेडफोन लगा कर ऑफिस का काम कर रहा था | मैं देखा की हेडफोन का तार लैपटॉप में नहीं लगा हुआ था , आश्चर्यचकित हो कर मैंने पुछा - "कौन सा गाना सुन रहा है ?"
"तुम्हे उससे क्या , मैं कुछ important सुन रहा हूँगा "
"अच्छा क्या , जैसे?"
हँसते हुए कहा उसने -"कान पर ऐसे ही लगा रखा है , सर्दी जुकाम  है तो ठंडी हवा नहीं लगेगी "
मैंने फिर से चुटकी ली -"रूम में तो हवा नहीं है , बरहाल  मैं सिर्फ सांस ले रहा हूँ !"

वापस प्लग लगा लिया उसने , झेंप कर |
उफ़ विकट !!

Wednesday, June 6, 2012

Office Lift

जब तक बाप के पैसे से  बाल कटवाते थे तब तब पैसे के लिए मेनू चार्ट दिखा ही नहीं था | बचपन में चुन कर सबसे महंगा वाला सलून में ही बाल कटवाना एक शौक़ था , आखिर दोस्तों पर रौब जमता था | पैसे कैसे कमाए जाते थे , कमाने वाले जाने | ख़र्ची के पैसे बाल बनवाने और ऊपर से टिप पर जाते थे | हर हफ्ते हफ्ते | जैसे जैसे ज़नाब बड़े हुए , सलून सस्ते हो गए | आजकल बंगलौर में आईटी वाला जॉब करते है , मगर बाल बगल वाले गली में मात्र ३० रुपये में कटते है | कहते हैं यार अपनी खेती है कहीं भी कटालो , क्या फर्क पड़ता है ? छोटे सलून के फायदे बताते हुए कहते हैं अच्छी देश विदेश की बातें हो जाती है , मसालेदार चाय भी फ्री मिल जाती है और priority मिलती है अलग से | बड़ी दूकान में नाई नहीं होता है , मशीन होता है वो भी professional | बातें होती ही नहीं है , सन्नाटा छाया रहता है , जिसको AC की मद्धम  आवाज़ भेदती रहती है | बचपन के दिन याद आते ही शर्म से आँख झुक जाती होगी | 
एक यह थे , और एक हमारे विकट सम्राट है | पैसे की अहमियत नहीं है , यह अच्छी बात  है | परवाह न हो  तो  कोई  बात नहीं , मगर  उसके  लिए भी पैसे होने चाहिए | बैंक वालों ने उन्हें सुदर्शन चक्र की तरह   क्रेडिट कार्ड दे दिया है | आजकल बाल वहीँ कटाते है जहाँ क्रेडिट कार्ड चलता हो | पॉइंट्स मिलता है , अलग से | मैंने पुछा - भाई कितना बिल आता है जो खूब सारा पॉइंट जमा हो जाये | हज़ार की कटाई, हज़ार की मरम्मत , और कुछ पांच सौ में दाढ़ी , साथ में एक दो सौ टिप भी दे देते है , जिससे  इज्ज़त फ्री मिल जाये | 
सच ही कहते है शौक़ बड़ी चीज़  है | एक दिन office लिफ्ट में कुछ ज्यादा  ही आईने  को  निहारा  जा  रहा  था , मैंने टोक  दिया -'बात क्या है '
"भई, कुछ अलग लग रहा है क्या ?"
"हाँ तू ज्यादा मुस्कुरा रहा है "
"वो नहीं , ज़रा गौर से सोचो "
मैंने कहा - मुझे सोचने के लिए गौर नहीं करना पड़ता है , बताना है तो बताओ| वैसे थोडा सा इशारा मिल ही गया था , ज़नाब सलून से आ रहे है |
"कुछ तो अलग लग रहा होगा ना"
"कितने पैसे खर्च किये "
फिर से मुस्कुरा उठा जैसे तीर निशाने पर लगा हो , छाती चौड़ी करके बोलता है - अच्छी जगह , पैसे कौन देखता है ? हम तो रुपये में बात करते है | 
एक हाथ से बाल सहलाना और तिरछी नज़र के  हरेक एंगल  से खुद को देखकर उम्मीद  ऊँची हो गयी थी |
तभी लिफ्ट रुकी , एक लड़की अन्दर आई, मुझे देखा और विकट को बोली - "can you please press 6th floor  ?"

मैंने हंस दिया , बस |

Tuesday, June 5, 2012

Downpour

 बारिशों के मौसम में कभी कभी मुसलाधार बारिश होती है , पानी बरसना भी कहते है | कोई बोलता है पानी गिर रहा है , जी नहीं वैसे नहीं  जैसे एक आदमी गिर सकता है | गुरुत्वाकर्षण का खेल है , सब नीचे ही गिरेगा | मैंने भी आज तक किसीको भी नीचे से ऊपर की तरफ गिरते नहीं देखा है | अंतरिक्क्ष  गया नहीं सो पता नहीं |
ऐसे  ह़ी एक दिन जब ऑफिस  की छत  पर जाने से पता चला की मुसलाधार बारिश से सारा बैंगलोर भींग  रहा है , तब हमें गरमागरम पकोड़े खाने की तलब जाग पड़ी | भाग कर कैफेटेरिया गए और चार प्लेट आर्डर दे दिया | विकट बाबु भी हमारे साथ थे, आजकल बहुत संभल संभल कर बोलते है , लेकिन ज़बान का क्या , कब फिसल  जाए |
"देखो , कितना बारिश गिर रहा है " - आख़िरकार वो बोल पड़ा | पकोड़ें में देरी हो रही थी , बारिश की नमी ने मिट्टी की खुसबू को और भी सौंधी कर दिया था, मसखरी के लिए इतना बहाना कभी कम नहीं था |
मैंने हिंदी का पाठ पढाया - "बारिश होती है , गिर कैसे सकती है ? " कहीं उठ के भाग गयी तो |
अभिमन्यु की तरह चक्रव्यू में फँसते हुए कहा - "कुछ भी बोलते हो तुम "
"और क्या "
तभी ज़ोरदार बिजली कड़की , विकट ने कहा - "लगता है कोई ऊपर लड़ रहा है "
मैंने भी विचार प्रकट किया - "तभी तो पानी गिर रहा है , लड़ाई करने पर "
मुस्कुराते हुए कहा - "पानी गिरता नहीं , होता है "
मैंने समझाया , आकाश में बादल होते है ?
हाँ |
बादल आकाश में ह़ी इधर उधर घूमते है ?
हाँ|
'मान लो , दो बादल घूमते घूमते टकरा गए तो , उनके अन्दर जो बर्फ  होती है वो नीचे गिरेगी  '
हाँ |
'नीचे गिरते गिरते गर्मी से वो पानी बन जाता है ', हो गया ना  |

हमारा विकट सर खुजा रहा था , बारिश गिरता नहीं है पर इसने पानी गिरा दिया | फिलहाल ज्यादा बात करने का वक़्त नहीं था , पकौड़े कहीं ठन्डे हो गए तो ?

"नल  बल जल ,
ऊँचो चढ़े |
अंत ,
नीच को नीच |"

-© 2012 सत्य घटना पर आधारित 

Thursday, January 12, 2012

Kabir ke Dohe

विकट बुद्धि  XVIII


कबीर के इस प्रचलित दोहे को कौन नहीं जानता - 
"पोथी  पढ़  पढ़  जग  मुआ ,
पंडित  भया  न  कोए , 
ढाई  आखर  प्रेम  के  
पढ़े , सो  पंडित  होए ."
सन १५०० शताब्दी के समय, संत कबीर ने इस दोहे से पंडितों और पुराणी पीढियों पर जो कटाक्ष किया था वो आज भी उतना  ही प्रभावशाली है |
साक्षर और पढ़े -लिखे में शायद जो अंतर होता है , उसका बहुत ही अच्छा उदहारण दिया है कबीर ने |
विकट की  समझ  में यह बात आई नहीं , शायद दिमाग का छेद छोटा होगा , शायद सिर्फ छेद ही हो |
खैर, शायद गूगल पर कहीं से उसे यह दोहा मिला और सर खुजाने लगा |
बोलता है - "कबीर कुछ भी बोलता है !"
मैंने कहा - "क्यूँ क्या हुआ  विकट"
"किताबें पढने से कुछ नहीं होता , ऐसा बोला कबीर ने "
"अच्छा , और क्या बोला "
"मतलब मैंने जो भी इंजीनियरिंग की पढाई की सब बेकार था , ढाई अक्षर कहाँ पढ़ाते है , किस कॉलेज में ?"
"उसका मतलब गहरे पानी में पैठने से मिलेगा , इतना छिछला नहीं है "
"लेकिन वह गलत है "
मेरे मित्र ने कहा - "भाई मेरे, यही तो अंतर है सिर्फ पढने और उसको समझने में "
"लेकिन वो तो प्यार करने को  बोलता है , अगर किसी को पंडित बनना है तब , ऐसा कैसे , कुछ भी बोलते हो "
"तो फिर तुम्हारे हिसाब से कबीर गलत है "
"और क्या , मतलब लाइब्ररी वायिब्ररी का कोई मतलब ही नहीं है , मैंने तो गलती की पढ़ कर  "

इस बार हमने कोशिश भी नहीं की समझाने की , आखिर कबीर ने बिलकुल सही कहा था |कबीर  इंसान  को  चेतावनी  दे  रहे  हैं  की  मूर्ख  इंसान  प्रभु  को  पहचान  जा  कर  ताकि  तेरे  मे  भी  प्रेमरस  भर  जाये  और  सारी  कायनात   तुझे  अपने  लगे | मैंने कहा समझदार बनना पड़ता है सिर्फ रट्टू तोता बन कर काम नहीं चलता है | अगर तुम सबसे प्यार से बात करोगे तब तुम्हारा हर काम आसान हो जायेगा | ठीक वैसे ही जैसे एक तजुर्बेकार व्यक्ति ज्यादा महत्व्य पूर्ण होता है एक पढ़े लिखे से | कबीर के दोहे छोटे होते है पर बात वो बड़ी कह देता है |  विकट  अपना सर खुजाने लगता है |

थोड़ी देर बाद वो बोल उठता है - "अगर इंजीनियरिंग में मैंने एक गर्ल फ्रेंड बनाया होता तो शायद मैं आज तुम लोगों का बॉस होता , हैं ना |
Shit , मुझे कबीर पहले मिल गया होता "|
मैंने कहा - "काश "!


और कबीर का एक दोहा याद आ गया मुझे -

"माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर । 
आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर ॥"

-© 2011 सत्य घटना पर आधारित

Wednesday, January 11, 2012

Loser's Bet

विकट बुद्धि XVII

बिरयानी एक ऐसा डिश है जिसके शौक़ीन हम सारे दोस्त हैं , बात बात पर इसकी कसमें खाते रहते है | अच्छी बिरयानी और उसकी सुगंध के हम कायल है , मैंने तो तीन ब्लॉग भी लिख डाला है | ऑफिस में शर्तें तो लगती रहती है , कभी सचिन के शतक पर, सहवाग के छक्कों, बारिशों के होने पर या फिर कितना salary hike किसको मिलेगा | हम लोगों की तो बात ही निराली है , हमारे दल में अगर किसी ने भी कोई बात छेड़ी तो तुरंत बिरयानी की शर्त लगती है और हारने पर सबको बिरयानी खिलानी पड़ती है | खाते वक़्त अगर कोई कोकाकोला आर्डर करे तो नहले पे दहला | विकट आजतक इसी उम्मीद में है की शायद एक बार जीत जाए | जनाब आजतक हारते आये है और हम सभी बिरयानी खाते आये है|

ऐसे ही किसी दिन विकट ने बड़े confident से एक शर्त लगा डाली, आखिर उम्मीद से दुनिया चलती है | शर्त की अहमियत सिर्फ इतनी थी मेरा एक मित्र जो सिगरेट पीता है उसको एक हफ्ते के लिए छोड़ना होगा | छोटी सी बात थी, मेरा दोस्त शर्त जीत गया | हमने छक कर बिरयानी खायी | उसके बाद तो तांता ही लग गया | हालत इस कद्र तक आ गिरी की विकट ने यहाँ तक बोल दिया की अगर वो जीत गया तो जीतने की ख़ुशी में हमसबों को बिरयानी खिलायेगा| वो अलग बात है की हमसे मुकाबला आसान नहीं होता | खुद लगता है , खुद हारता है और फिर उम्मीद खुद ही रखता है| हमारी लाख चेतावनी के बाद भी हिम्मत नहीं हारता पर शर्त जरूर हार जाता है| 
एक दिन ऐसे ही बैठे हुए , सामने गूगल की खिड़की खुली हुई थी , पूछता  है - "अच्छा मैं तुमलोगों से कुछ प्रश्न करूँगा , ज़वाब दे पाओगे ?"
"लगी शर्त "
"हाँ हाँ , जिसकी भी लगानी है लगा लो "
"बिरयानी की "
"चलेगा "
मैंने कहा "यार , इस बार बिरयानी 'दम पुख्त' में खायेंगे "
"जहां भी खाना है , जीतूँगा मैं ही "
"सोच लो , 5Star होटल है "
"उससे क्या हुआ "
"एक बिरयानी 900 रुपये की होती है "
"हाहाहा जीतूँगा मैं ही , खूब खाऊंगा फिर तो मैं "
"टैक्स अलग से , विकट, सोच लो बाद में मत बोलना की हमने आगाह नहीं किया "
हमारे लाख चेतावनी के बाद भी अड़ा रहा , हमने बोला चलो आज दम पुख्त के दस्तरखान में उम्दा बिरयानी का लुफ्त उठा ही लिया जाये , आखिर किस्मत खुद तिलक लगा रही है |
और हमेशा की तरह हम शर्त जीत गए |वो कहते है की शर्त के दूसरी तरफ एक समझदार इंसान होता है , सही कहते है |

इस धक्के के बाद , विकट से बात हुई |
"यार, अगर तेरी शादी हो जाएगी तो बीवी को बिरयानी खिलाने ले जाओगे ?"
विकट ज़वाब देता , उसके पहले एक मित्र ने चुटकी ली - "उसको बोलना , बेवकूफ , शर्त लगा लो , खिला देता हूँ "


-© 2011 सत्य घटना पर आधारित 

Monday, January 9, 2012

Blue Something

 विकट बुद्धि XVI 

आजकल शादियों का मौसम है, सारे हमउम्र जो इससे बचे हुए है खुद ही मुकाम की तालाश में एकजुट हैं | विकट भी शायद अपने एकांकीपन के विषय को ले कर पता नहीं कितनी बार कोशिश कर चुके हैं |
ऐसे ही एक कोशिश से रु-ब-रु होकर जब वो ऑफिस आया तो उसके चेहरे पर एक सुनहरी चमक थी| हम समझ ना पाएं, आखिर बात क्या है |
इससे पहले की हम कुछ पहल   करते   , विकट खुद  ही बोल पड़ा  - "मैं  कल  एक मीटिंग  पर गया  था   "
हम सबने एक साथ कहा - "हम्म्म " 
हमें और इस बारे में जानना था , एकटक देखते रहे | उसने हमें वो सब बताया जो सामान्य तौर पर बताया जाता है , जैसे लड़की अच्छी लगी , हमने  बातें की , वैगेरह वैगेरह
मैंने पुछा "कॉफी पर गए थे या उसको चाय ही पिला दिया "
"कैसी बात करते हो , चाय कॉफ़ी तो सब एक ही है "
"हिंदी मूवी नहीं देखते हो क्या? "
"उसमे क्या है , जो पीना है पियो , मैंने बात की "
"पहली बार , लड़की से ?"
झेंप गया वो|
मेरे एक दोस्त ने पुछा , "क्या पहन कर गए थे, आखिर First Impression is the last  impression"
"मैं १५०० रुपैए का शर्ट पहना था "
"और नीचे "
"नीचे कुछ भी पहन लो , क्या फर्क पड़ता है "
"क्यूँ , लुंगी या मुंडू "
जानकारी के लिए बता दूँ , मुंडू सफ़ेद रंग की लुंगी को कहते है , यह केरल  में  अत्यधिक प्रचलित है |
"वो छोड़ो , हमेशा की तरह काला वाला पैंट पहना था, धारियों वाली  " 
वो इतने व्यौरेवार  वर्णन (Detail) में जिक्र करने लगा की किसी ने मज़ाक में पूछ डाला - "और उसके नीचे किस रंग की चड्डी पहनी थी , वो भी बता दे "
"उसने कहा - ब्लू " वैसे उसका इशारा नीले रंग की शर्ट पर था , शायद ख़ुशी में सुनायी भी कम देता है |

जब हमने बोला की- " Superman तो लाल रंग का पहनता है और वो भी ऊपर " तब जाकर उसे समझ में आया की हमारा प्रश्न शर्ट की ओर नहीं था |
पर हमने अपनी हँसी का बेहिसाब नियंताश पूरा कर लिया आज|


-© 2011 सत्य घटना पर आधारित 

Monday, December 26, 2011

Wrong Number

विकट बुद्धि XV

सुना है दीवारों के कान होते है , हमारे ऑफिस में तो Cubicle होते है| दीवार आधे भर के होते है ताकि आप सबको और सब आपको देख सकें | कोई अगर धीरे से भी बात करे तो गौर करने पर सुना जा सकता है , पर विकट बुद्धि तो ऐसे ही ज़ोर से बात करता है | ऐसे ही एक दिन मैंने उसे किसी से बात करते सुना , संछेप में उस वार्तालाप का कुछ महत्वपूर्ण अंश -
विकट का फ़ोन बजता है , विकट बहुत ही ख़ुश हो कर बोलता है - "हेलो , yes sir , sorry भईया "| शायद आवाज़ से उसे पता चला होगा की कोई और है जिसको वो भईया कह सकता है|
"किससे बात करनी है ,.... नहीं मैं वो नहीं हूँ ..... मेरा नाम ...... वो छोड़ो आप कौन हो ....."
विकट ने माथे पर बल लाते हुए कहा -"यह wrong number है " और उसने फ़ोन काट दिया | हम सभी हमेशा की तरह हंस पड़े और कहा कौन था , उसने ज़वाब दिया - "कोई तो लड़की थी , शायद कुछ बोल रही थी "
कुछ तो हुआ , गर्दिश की बातें गर्दिश ही जाने | उसने फिर से उस नंबर पर Dial किया - "hello , आपको किससे बात करनी है "
अब शायद उसे पता चला होगा की यह फ़ोन उसी के लिया आया है - "हाँ , मैं बोल रहा हूँ , क्या चाहिए "
"मेरे को पता नहीं कितना देना है , आप बताओ , क्या बात करते हो ............ यह due date क्या होता है ?"
हम समझ गए की credit card  वाले का call है , ज़रूर पेमेंट नहीं हुआ होगा | जानकारी के लिए हमारे विकट ने नया नया क्रेडिट कार्ड ख़रीदा है , उम्मीद से शायद एक दिन कार भी खरीद ले यह सोच कर है | उस दिन से विकट ने एक नया जूता , महंगा वाला earphone , पैंट और शर्ट खरीद चूका है | 
"अच्छा मेरे को पता नहीं , अभी कैसे होगा , मैं next month पैसे दे दूंगा .... "
आगे बोला उसने - "अभी तो Christmas time है मुझे शौपिंग करना है , उसके लिए पैसे रखे है ... तुम्हे क्यूँ दे दूँ ?  "
हमारी तो हंसी रुकने का नाम नहीं ले रही , यह सोच के बुरा हाल था की फ़ोन के उस तरफ का क्या हुआ होगा |
विकट ने फिर कहा - "मैं पेमेंट कर दूंगा , अच्छा कितने है "
ज़वाब सुन कर बोला - "ऐसा क्या ............., इतना.................... , क्या बात करते हो , इतना कैसे "
शायद कुछ समझने के बाद बोलता है - "अच्छा मैं हज़ार देता हूँ अभी , बाकी बाद में सोचूंगा "
कह कर फ़ोन काट दिया |


हम  सभी  को  हँसता  देख  कर  कर शायद वह झेंप गया था , तभी फिर से उसका फ़ोन बज उठा , इस बार उसने Cubicle से बहार जाकर  बोला - "हेल्लो ....."
आजकल वो हमारे सामने फ़ोन पे बात नहीं करता |

-© 2011 सत्य घटना पर आधारित 

Wednesday, December 21, 2011

Fat and Bicycle

विकट बुद्धि XVI


आजकल भारत में वजन कम करने का खूब विकल्प चल पड़ा है | विकट भी Calorie Conscious हो गया है | हालत इतनी ख़राब है की अगर आप चाय में एक चमच्च चीनी डालते हो तो वो टोक देगा की आपने २०० Kcal  ज्यादा लेली |
खुद ज़नाब किसी भैंस को टक्कर मार दे तो शायद भैंस की दो तीन हड्डियाँ चटक जाये , इन्हें तो जूं भी ना रेंगे | भाईसाहब , आजकल नेट पर तरह तरह के विकल्प खोजते रहते है और हमारा ज्ञानवर्धन किया करते है |
विकट ने एक दिन कहा - "मैं Zumba डांस करूंगा तो मैं हृतिक रोशन हो जाऊँगा |"
"फिर तो हृतिक आत्महत्या कर लेगा|"
"अरे , वो मेरा मतलब है मैं पतला हो जाऊंगा "
मैंने बोला - "पतली भैंस , लेकिन फिर भी तो भैंस ही कहेंगे हमलोग "
"वो छोड़ो  , यह सुनो , मैं खाना खा कर भी अपना वज़न कम कर सकता हूँ  "
मेरे मित्र ने कहा - "अच्छा , वैसे तो फिर दुनिया में कोई मोटा ही नहीं होगा "
"व्यायाम करो " किसी ने सुझाव दिया |
मैंने कहा - "हमलोगों के साथ रहोगे तो गधे से आदमी बन जाओगे "

विकट बोला -"हाँ वो तो है , पर उसके लिए Gym भी जाना पड़ेगा | "
थोड़ी देर बाद फिर से बोला - "आदमी बनने से अच्छा है , मैं एक साइकल खरीद लूँ "


-© 2011 सत्य घटना पर आधारित 

Tuesday, December 20, 2011

Missile Impossible

विकट बुद्धि XIII

बात Israel की हो रही थी एक दिन , शायद अखबार पढ़ा था विकट ने| वो हमेशा सुबह या दोपहर में गायब हो जाता है और आधा खबर किसी अकबार से और आधा अपने दिमाग से पढ़ कर हमें बताता है| उसकी यह आदत बड़ी निराली है ,  शुरू शुरू में हमें पता ही नहीं चलता था की यह बन्दा जाता कहाँ है | मुझे लगता था की नित्यक्रिया निपटाने जाता होगा तभी मुझे बताता नहीं है | खैर, एक दिन जनाब अखबार हाथ में लिए पकडे गए , तब हमनें जाना इनके पास देश विदेश की रंगीन और मनोरंजक बातें कहाँ से आती है | वो अलग बात है की मसाला खुद ज़नाब  लगाते  है , वो भी इतना की बस सामने वाला हँसते हुए दम तोड़ दे | 
विकट ने सवाल दागा , समझो एक misile था -"Israel तो छोटा सा है बम इतना बड़ा पता है "
मैंने कहा - "कितना बड़ा है क्या ?"
उसने अपने एक हाथ की तरफ इशारा किया बोला - Israel इतना छोटा है , और बम तो बड़ा होता है, उड़ जायेगा , पता ही नहीं चलेगा |
मेरे मित्र ने पुछा - "तुम्हे कैसे पता ?"
"वो छोड़ो यह बताओ , बम कितने तरह के होते है "
मैंने कहा - "कभी बम देखे हो ?"
"हाँ, कौन सी बड़ी बात है , तुमने दिवाली पर पटाखे नहीं छोड़े क्या "
यह ज़नाब अपनी ही धुन में थे, हमारी तो हंसी बस निकल रही थी , आवाज़ दब गयी थी शायद कहीं पे| उस गूंज में उसका  चेहरा फिर चमक रहा था |
उसने हमें ज्ञान बाँटा - "पता है , Missile से बम मारते है "
मैंने बोला -"अगर निशाना चूका तब?"
"अगर missile target पर नहीं गिरा तो, उसपे बैठ कर आ जाना इंडिया वापस , टिकेट भी नहीं लगेगा |
मेरे मित्र ने कहा - "missile पर बैठेगा तो तेरे पिछवाड़े में आग लग सकती है , फिर क्या करोगे ?'
उसने सर खुजाते हुए कहा - "कैसी बात करते हो , यह तो मैंने सोचा ही नहीं , ओह shit |"

Exactly , Shit ! हमारा दिमाग Gaza Strip बनने से बच गया |
अखबार अच्छी तरह से ना पढने पर आपको हंसी का पात्र बना सकती है , हमने पता कर लिया है |

-© 2011 सत्य घटना पर आधारित 

Monday, December 19, 2011

Matchbox burns

विकट बुद्धि XII


ऑफिस के बाहर, सड़क पर एक छोटी सी सिगरेट-बीड़ी की दुकान है| कभी कभी टहलते हुए हम वहां जाते है |
एक बार दुकानवाले की छोटी सी दुकान पर Omkara का बहुचर्तित गाना "बीड़ी जलईले पिया , जिगर मा बड़ी आग है " बज रहा था|
विकट का ध्यान उस पर गया - उसने पूछ डाला-"यार, जिगर से कोई कैसे आग लगा सकता है ?"
मैंने बोला - "तुम बताओ , आखिर सबसे समझदार तुम्ही हो यहाँ पे |"
"अगर मेरा जिगर अन्दर नहीं, बाहर होता तो मैं जला लेता "
हम सभी का माथा ठनक गया , मेरे एक ठनके मित्र ने पुछा -"बाहर होता , मतलब क्या है तुम्हारा ?"
"क्या बात करते हो , जैसे माचिस जलाते हो , वैसे "
"अच्छा , माचिस कैसे जलाते है "
"उस पर जो Gun -Powder होता है न, उसको रगड़ो, तब जल जायेगा "
"किस्से रगड़ो, ऊँगली से?"
"वो छोड़ो, अरे उसके अन्दर एक तिल्ली होती है उससे , क्या बात करते हो , नहीं तो मैं बिपाशा से पूछ लूँगा ?"
मैंने कहा - "बिपाशा तेरी दोस्त है क्या?"
"नहीं तो , लेकिन कौन बड़ी बात है , Google से मैं उसका Email Id ले कर पूछ लूँगा "
"अबे, पूछ तो लेगा , पर क्या वो बताएगी ?"
"वो छोड़ो, तुम कैसे जलाते जिगर से "
"मैं बीड़ी नहीं पीता , मगर फिर भी पता है "
इतने में मेरे दोस्त जिसके पास एक माचिस थी, उसे निकल कर वो बोला ,-"अच्छा तू जला कर दिखा , फिर बात करते है "
"जिगर भी कोई चीज़ है , जब माचिस है तो लोग जिगर से क्यों जलाएंगे , बिपाशा बेवकूफ़ है "
मेरे मित्र ने कहाँ - "ज़ब माचिस नहीं होगी तब कैसे आग जलाओगे ?"
"वो सोचने वाली बात है , कैसे ?"
"अरे तुम नहीं जानते "
"क्या बात करते हो "

काम था हमारा सिर्फ उसे उसके दिमाग पर जोर डलवाना , जो हमने बखूबी कर दिया | हम वापस अपने काम पर लग गए|
थोड़ी देर बाद वो अचानक से बोला , -"यार बिपाशा सही में बेवकूफ है , जिगर का मतलब Liver होता है, आग तो  दिल से लग सकता है , but Liver से कैसे ?
हम सबों के पास इस सवाल का कोई ज़वाब नहीं था |

-© 2011 सत्य घटना पर आधारित 

Wednesday, December 14, 2011

Bike on the Rocks

विकट बुद्धि XI
अब हमें विकट बुद्धि के साथ कैफेटेरिया में टाइम पास करने की आदत सी हो गयी है, उसके जोक्स जो इतने मजेदार और मूल होते है | कोई भी दीवाना हो जायेगा |
हर दिन की शुरुआत जैसे सूरज के आने से होती है , हमारी खुशहाली ऑफिस के कामों के बावज़ूद विकट बुद्धि के आने से होती है |
हमेशा की तरह विकट मुश्कुराते हुए हमारी तरफ देखता है जैसे कल का कोई सवाल का ज़वाब Google में मिल गया|
ऐसे ही एक दिन मैंने उससे पुछा - "क्या हुआ ?"
"तुम्हे पता है - एक नयी Bike आई है , जो पथ्थरों पर भी जा सकती है "
मेरे दोस्त ने कहा - "अच्छा कहाँ देखा ऐसी Bike को?"
"TV पर, कल ही नया advertisement देखा था "
"अच्छा, किस कंपनी की Bike है ये?"
"वो पता नहीं "
"नाम क्या है "
"नाम में क्या रखा है, कुछ भी रख दो |"
मैंने बीच में बोला -"फिर क्या अच्छा है , पथ्थरों पे चलना "
उसने कहा - "और क्या , Bangalore के सड़को पर आराम से चलेगी "
हमारी हंसी तो बस फूटने ही वाली थी की उसने बोला - "मैं खरीदूंगा उसे "
मैंने बहुत ही गंभीरता से पुछा - "बिना Test Drive के ? क्या Features है उसके ?"
"वो मैं गूगल से पता कर लूँगा , फ़ोन पर "
"Google का फ़ोन नंबर है क्या "
"वो छोड़ो, मैं फ़ोन कर के showroom वाले से पूछ कर बता दूंगा ? और उसका नंबर Google से मुझे मिल जाएगा "

"कितने CC की है , कितना BHP है ?" यह सब सवाल सुन कर वो अचानक से बोल पड़ा -"इसका एक नया color है , unique , एक दम नया | मैं तो वही लूँगा |"
मेरे दुसरे मित्र ने जो अभी अभी आया , पूछ डाला -  एकदम फ़िल्मी - "कितना देती है?"
मेरे मित्र ने तुरन्त ही दूसरा सवाल दाग दिया ,"कितने की है ?"
"पता नहीं , कितने की होगी 70 -80 हज़ार से ज्यादा थोड़े ही होगी?"
मैंने मज़ाक छेदा -"70 -80 में अच्छी Bike , हम्म्म्म कैसे, Second Hand ? अरे second -hand होने में कम से कम एक साल लगेगा |  "
यह सब सुन कर वो अपना सर खुजाने लगा |

दुखती राग पे हाथ रखते हुए किसी ने पीछे से आवाज़ उठाई - "पैसे हैं ? "
"नहीं, But क्रेडिट कार्ड से  , I can have Visa Power "
"तो इसका मतलब तुम्हारे पास पैसे  भी नहीं है और क्रेडिट कार्ड भी नहीं "

वो सोच में पड़ गया , हमने उसे समझाया क्रेडिट कार्ड और उसके दुरुपयोग | इतना ज्ञान काफी था शायद , यह सोच कर वापस हम अपने अपने काम में लग गए , आखिर सुबह शुरू ही हुई थी|
लंचटाइम में वो हमारे साथ नहीं था | पता चला की किसी क्रेडिट वाले के साथ फॉर्म भर रहा था |
और शाम को test drive भी दर्ज़ करा रखा था |

अगले दिन जब हमने पुछा की -"तब, Bike खरीदने की खुशखबरी कब दोगे ?"
उसने तपाक से ज़वाब दिया - "मैं अब कार खरीदूंगा "
"वो क्यूँ भला, कौन सा ?"
"वो पता नहीं, सुना है कोई नई कार आनेवाली है |"
मैंने बोला - "पथ्थरों पर चलने वाली ?"

-© 2011 सत्य घटना पर आधारित 



Tuesday, December 13, 2011

Powered By Google

विकट बुद्धि X

हम सबों ने एक चीज़ हमेशा गौर किया है की विकट का हर ज़वाब, हर चीज़ Google के इर्द्द गिर्द ही रहता है , तो हमने यह सोचा की इसकी ज्ञान का राज़ आज जान लिया जाए |
आखिर इसका ज्ञान बाबा कौन है जो इसको तरह तरह की ज्ञानी बातें बताता है |
हमेशा के जैसे , कॉफ़ी टेबल पर, मैंने पुछा - "यार, ये Google क्या है ?" 
कोई और इसके पहले ज़वाब देता , विकत कूद पड़ा -"Google को सब पता है "
"पर यह है क्या ?"
"Google एक search engine है "
"अच्छा कितने Horse power का है "
"क्या बात करते हो ? तुम बहुत नटखट हो "
मैंने आगे बात बढाई - "अरे engine है तो पॉवर तो होगा न , जैसे मेरे bike की है "
उसने कहा -"वो छोड़ो , Google is a search  engine , तुमको जो भी doubt है , उसको बताओ तो वह उसका answer देगा "
मेरे मित्र ने कहा -"एसी बात है, तो ज़रा यह बताना की देव आनंद की बेटी के husband का क्या नाम है? "
"कौन सी बड़ी बात है, Google सबसे अच्छा Platform है  "
मैंने लुफ्त लिया - "कौन से रेलवे स्टेशन का platform है ?"
मेरे मित्र ने कहा -"सिर्फ सबसे ज्यादा user होने से कोई search engine बेहतर नहीं होता है "
उसने कहा - "क्यूँ नहीं "
मैंने कहा - "जिस तरह microsoft OS सबसे बेहतर OS नहीं है उस तरह "
"फिर कौन सा OS बेहतर है "
"Unix , LINUX ", मस्ती के लिए हमने उसे और छेड़ते हुए कहा - "NASA भी वही  use करता है "
वो बहस लड़ाते हुए बोला -"जैसे UNIX एक platform है LINUX का उसी तरह , NASA से क्या होता है , उसको सिखने में बहुत टाइम waste कौन करेगा? क्या बात करते हो , कुछ भी "
मेरे कंप्यूटर इंजिनियर दोस्त ने कहा - "लेकिन दोस्त, Unix तो खुद एक Operating system है ,...."
मैंने बोला - "Space Rocket चलाना मुश्किल होता है , इसका मतलब यह नहीं की वो बेकार है, और साइकल सबसे अच्छा "
मेरे दोस्त ने चिढाया -"साइकल से तू क्या चाँद पर जा सकता है ?"

वो आगबबुला हो चूका था हमारी बातें सुन कर , हमें क्या है हम तो कुछ भी बोलते है | उसने कहा - "लेकिन Google को सब पता है, वो नंबर#१ है  "
मैंने कहा - "किसने बोला तुम्हे , Google ने ?"
"फिर कौन है नंबर#१ पे ?" उसने हमें Challenge किया | मजेदार बात तो यह थी की मुझे सत्य से ज्यादा इसकी बातों में मज़ा आता है | इसकी बातें ऐसे ही मजेदार बनी रहे मैंने उसे Google करने के लिए बोला और यह भी बताया की हर चीज़ Google पर नहीं होती है , वो एक Library जैसा होता है जहां पर 90 % irrelevant search results मिलते है| Fact on Google
यह सुन कर उसने बोला - "Library है तो Book कहाँ है , मैं तो Google को ही Thank you बोलूँगा "
मेरे मित्र ने समझाया -"अगर तू किसी से पूछेगा और उसका ज़वाब होगा तुम सौरभ से पुछ लो , तो तुम किसको Thank You बोलोगे? Google उसी तरह एक Portal है| तुम्हे ख्याल रखना होगा की क्या सही और क्या गलत है |  "
उसने बोला -"Google के अन्दर एक रोबोट है जो हमेशा सही ज़वाब देगा "
"धत तेरी की , रजनीकांत है क्या "
"नहीं पर वो अच्छा है "

हम सभी निरुत्तर हो गए , इस मोटी बुद्धि के अन्दर कुछ नहीं घुसने वाला |
जब हम अपने डेस्क पर वापस गए तो उसने Google पर search कीया की देव आनंद की बेटी का husband कौन है ? "What he searched?" (Click on the link to see)
Google निरुत्तर था |

-© 2011 सत्य घटना पर आधारित 


Monday, December 12, 2011

Black Grapes

विकट बुद्धि IX


कभी कभी सेहत के लिए फल खाना अच्छी बात होती है , इसी तरह कभी मैंने ऑफिस में एक Fruit bowl खा रहा था |
उसमें नारंगी, सेब,तरबूजे , खरबूजे, पपीता और काले अंगूर थे , मैंने उन पर चाट मसाला डाला और भोंक भोंक कर pick से खाने लगा|
विकट बुद्धि मेरे ठीक सामने बैठा था , उसने एक अंगूर उठाया और खा लिया |
अंगूर श्याम था , मैंने छेड़ दिया -"तुममे  और इस काले अंगूर में क्या समानता है ?"
"दोनों लड़कियों को बहुत पसंद है "
"फेंकना बंद करो और सच्चाई बताओ, वैसे भी लड़कियां किशमिश ज्यादा खाती है "
वो बोला - "दोनों स्वीट है "
मेरे दोस्त ने बोला - "कोई और बताओ , यह तो बहुत मुश्किल है पता करना "
"अंगूर और मुझमे नशा है , अंगूर को सड़ा कर Wine बनता है जो Exotic होता है "
मेरे मित्र ने कहा - "तुमको सड़ाने पर कौन सा wine बनेगा , उसके बावज़ूद exotic होना तो नामुमकिन है "
वो बोला - "कौन सी बड़ी बात है |"
इतने में उसने अंगूर को हाथ में लिया और उसपर गौर किया , हमारी हँसी छुट पड़ी |
उसने तपाक से कहा - "मुझे पता है तुमलोग क्यूँ हंस रहे हो ?"
"क्यों ?"
"तुम्हे लग रहा होगा लंगूर के हाथ में अंगूर आ गया "
हमने तो ऐसा सोचा नहीं था , पर अच्छा लगा | फिर भी मैंने कहा -"अंगूर खट्टे लोमड़ी के लिए होते है , तुम तो लंगूर हो और तुम्हे ये मीठे लगते है "
"क्यूंकि , ये मेरे हाथ में है "
"मतलब तुम मानते हो की तुम लंगूर हो |"
उसका चेहरा ऊतर गया , जैसे वह फिर से फँस गया हो | इसी सकपाहट में उसके हाथ से अंगूर छुट गया , और नीचे गिर गया |

मैंने कहा - "वैसे दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम |"
सारा माहौल ठहाको से भर गया |


-© 2011 सत्य घटना पर आधारित

Red and Long


विकट बुद्धि  VIII

एक बार हुआ यूँ की हम सभी ऑफिस गार्डेन में टहल रहे थे, लंच के बाद टहलना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है मगर हमलोग समय व्यतीत करते है |
टहलने से चुस्ती भी रहती है | विकट बुद्धि भी चुस्त था , चहकते हुए उसने आखिर पूछ डाला -"अच्छा यह बताओ Anaconda क्यूँ  बहुत लम्बा होता , कल ही मूवी देखी| कितना लम्बा हो सकता है? "
मेरे मित्र ने कहा -"तुम्हे कितना लम्बा चाहिए?"
"वो छोड़ो यह बताओ , किसी ने Anaconda part II देखी है क्या "
मैंने कहा -"वो छोड़ो , यह बताओ , कौन सी चीज़ जो हरे रंग की होती है और बहुत लम्बी और लम्बी  होती है "
"Anaconda तो काले रंग का होता , हरा भी होता है क्या ?"
"मैं Anaconda की बात नहीं कर रहा हूँ, Answer दो "
"कितनी लम्बी ?"
"जितनी तेरी सोच "
"क्या बात करते हो , कुछ तो बताओ , हरा साँप?"
"गलत ज़वाब , सोचो और सोचो "
हमने उसे उसके दिमाग पे ज़ोर डालते हुए कहा -"बहुत आसान है "
दुसरे मित्र ने उकसाया -"मुझे पता है इसका ज़वाब "
अब वो बेचैन हो गया और उट-पटांग answer देने लगा -"पेड़ , सांप , घास , etc etc "
आख़िरकार मैंने उसे ज़वाब दिया - "हरे रंग का धागा "
"उफ़ यह तो आसान था , shit  "

मुझे मस्ती सूझ रही थी -"अच्छा एक और आसान सा सवाल है -कौन सी चीज़ जो काले रंग की होती है और बहुत लम्बी और लम्बी  होती है "
"हाहाहा हाहा , यह तो पक्का Anaconda है "
मित्र ने कहा -"गलत, इतना भी आसान नहीं है "
उसने मुझसे कहा -"तुम बहुत नटखट हो - तो फिर हाथी का सूंड होगा "
"ग़लत"
"काला साँप"
"ग़लत "
"हाँ , अब पता चला , काला धागा "
मैं चिढाते हुए कहा - "ग़लत "
"अच्छा बता दो - मैं थक गया "
"हरे धागे की परछाई :) "

मेरे मित्र ने आखिरी सवाल किया - "कौन सी चीज़ जो  लाल रंग की होती है और बहुत लम्बी और लम्बी  होती है"
हमने सोचा की यह तो बहुत ही आसान होगा और शायद इसको ज़वाब मिल जाये , पर विनाश  काले  विपरीत  बुद्धि  का कोई क्या कर सकता है |
उसने कहा - "लाल साँप , या कुछ जो लाल रंग का हो "
मैं कहा -"लाल anaconda ?"
"शायद , मैं sure नहीं हूँ "
टहलते टहलते हमने गार्डेन के दो तीन चक्कर लगा लिए , लंच टाइम ख़त्म हो गया था , हम अपने डेस्क पर वापस लौट चले|

थोड़ी देर बाद वो मेरे पास आया और कहा , "यार, मैंने google पर search किया , मगर सही answer नहीं  मिल रहा है, कहा से यह सब सवाल लाते हो तुम? "
मैं कहा -"have you tried Commonsense .com"
उसने कहा -"नहीं, अभी Google करता हूँ |" 

-© 2011 सत्य घटना पर आधारित


Wednesday, December 7, 2011

Elephant and Fridge

विकट बुद्धि VII


हम सबों को आजकल पहेलियाँ बुझाने में कुछ खास ही मन लगने लगा , उसका एक आसन सा कारण था विकट बुद्धि और उसके ज़वाब|
कुछ ऐसे हुआ उस दिन , मेरे मित्र ने कहा -"ऑफिस में सिर्फ Microwave रखते है, ताकि खाना गर्म करके खा सके, परन्तु यहाँ Fridge (Refrigerator ) होना चाहिए, ठंडी ठंडी बीर रखते और जब मर्ज़ी तब पीते| "
हम सब ने कहा- "इंशाअल्लाह "|
मगर विकट बुद्धि ने कहा - "इतना बड़ा Fridge कहाँ से आएगा , तुम तो बहुत Beer रखते |"
मैंने कहा - "कितना बड़ा ?"
उसने कहा - "क्या बात करते हो, बहुत बड़ा | कितने लोग है यहाँ |"
मेरे मित्र ने कहा - "अच्छा एक बात बताओ , मानलो उस fridge  जिसमे Beer है , उसमे एक हाथी को कैसे रखोगे?"
"खिलौना हाथी है क्या ? हाहाहा हा हा , क्यूँ मज़ाक करते हो "
"तुम सीधा सीधी ज़वाब क्यों नहीं देते , एक असली हाथी है , अब बताओ "
"तो Fridge कितना बड़ा उसपे depend करेगा , तुम लोग को मैं ही मिलता हूँ क्या ?"
"समझो, Fridge बड़ा है, विकट| और हाथी उसमे आ सकता है | "
उसने अपना सर खुजाते हुए बोला -"फिर मैं हाथी को बोलूँगा, वो खुद से Fridge के अन्दर चला जायेगा |"
दुसरे मित्र ने चुटकी ली -"और हाथी तेरी बात मान लेगा ?"
"क्या बात करते हो ? फिर क्या हाथी को अन्दर उठा के रह देंगे?"
मैंने कहा -"कैसे उठाओगे ? हलवा है क्या ? अच्छा चलो मान लेते है की तुमने हाथी को अन्दर रक्खा तो जो beer है उसका क्या ?"
"हाथी पी लेगा , पीने दो उसे | क्या प्रॉब्लम है |"
मेरे मित्र ने अगला प्रश्न डाला -"अब दुसरे हाथी को अन्दर कैसे डालोगे ?"
वो बोला -"अरे उसमे क्या है , उसको भी उठा के अन्दर डाल दो "
मैंने बोला -"और पहले हाथी का क्या ? उसको पहले बाहर निकालो फिर दुसरे हाथी को अन्दर डालना होता है |"
मैंने फिर बोला -"अच्छा अब तुम एक चींटी को Fridge में कैसे डालोगे?"
उसने बोला -"यह तो मैं जानता हूँ , हाथी को बाहर निकाल के चींटी को अन्दर डाल देंगे , हिहिहाहा"
मेरे दोस्त ने हँसते हुए कहा -"फिर से गलत , भाई मेरे , चींटी तो छोटी सी होती है , वो और हाथी एक साथ Fridge में आ सकते है "
"ओह Shit !"
मैं कहा -"अब बताओ कितने घोड़े Fridge में आ सकते है ?"
"एक , नहीं शायद दो , तुम बताओ कितने ?"
"एक भी नहीं क्यूंकि Fridge Already Full है "

उससे रहा नहीं गया , वो उठ के जाने लगा , हमने उसे रोका और बोला चलो अब आसान सा सवाल पूछते है , इसका शायद तुम उत्तर दे सकोगे |
वो फिर से मैदान-ए-जुंग में कूद गया |
पहला प्रश्न -"उस fridge में एक घोड़े  को कैसे रखोगे"
"उसको उठा कर रख देंगे "
"गलत ज़वाब , पहले हाथी को निकालो :)"
दूसरा प्रश्न -"दुसरे घोड़े को कैसे रखोगे? "
"पहले घोड़े को निकाल कर, दुसरे को अन्दर डाल देंगे "
"फिर से गलत ज़वाब , दो घोड़े आराम से fridge में आ सकते है "
तीसरा प्रश्न-"अब यह बताओ जंगले में एक जानवर missing है, कैसे "
"घोडा |"
"अबे लेकिन घोड़े तो दो है , प्रश्न में तो एक ही जानवर Missing है , थोडा सोच समझ कर बोलो "
जब वो अपना सर खुजाने लगा तब हमने उसे बताया की इसका सही ज़वाब चींटी है जो वह छोड़ आया था |
चौथा प्रश्न -"अच्छा अब यह बताओ की जंगले में इतने घोड़े क्यूँ है "
"वो छोड़ो यह बताओ की जंगले में घोड़े गिनता कौन है "
"Topic मत change करो , answer दो "
"उफ़ तुम बहुत नटखट हो , कैसे सोचते हो , मैं तो थक गया "
हमने उसे बताया -"क्यूंकि Fridge उतना बड़ा नहीं है की सारे घोड़े उसमे आ जाये "
हहह हा हा हा हा हा 

इतने में ही वो भाग उठा , हम सब भी अपने काम में लग गए| 
अगले दिन जब वो सुबह ऑफिस आया तो मैंने एक उद्दास सा चेहरा ले कर उसके पास गया , उसने पुछा - क्या हुआ ?
मैंने कहा - यार बहुत गलत हुआ है|
वो डर गया और उसकी हवा गुल हो गयी -"क्या हुआ ? बताओ मुझे ?"
मैंने बोला -"दो घोड़े मर गए "
"क्या बात करते हो , कैसे हुआ यह ?"
"कल तुम उनको fridge में छोड़ के क्यूँ भाग गए थे, रात  भर ठण्ड में वो मर गए , उनके पास कम्बल भी नहीं था | "
"Shit , और उस चींटी का क्या हुआ ?"
मैं बगलें झाँकने लगा , लेकिन हँसते हुए |

-© 2011 सत्य घटना पर आधारित

Tuesday, December 6, 2011

Blue Sky

विकट बुद्धि VI
हमलोगों की आदत है ऑफिस की खाली सीड़ियों पे बैठ कर गप्पें लड़ाया करते है | ऐसे ही एक शाम , हमेशा की तरह हम सभी गुफ्तगू कर रहे थे |
विकट बुद्धि भी हमारे साथ था | अचानक से एक गोरे लड़के को देख कर बोलता है -"देखो वो देखो "
दरअसल उसका इशारा हमारे एक मित्र की तरफ था जिसका रंग साफ़ है , उसने पुछा -"क्यूँ क्या देखूं ?"
विकट बुद्धि ने ज़वाब दिया -"गोरे होने से कोई फायेदा नहीं है "
उसने आगे कहा -"मैं काले से गोरा हो सकता हूँ पर कोई गोरा कभी काला नहीं हो सकता "
मैंने कहा -"बहुत Fair and Lovely का Ad देख चुके हो , ऐसा लगता है "
मेरे दोस्त ने पुछा -"कोई क्यूँ काला नहीं हो सकता , और क्यूँ होना चाहेगा ?"
"मेरा मनपसंद विषय Optics था - काला रंग सब रंग का मिक्स होता है, इसीलिए अच्छा होता है | "
मैंने पुछा -"अच्छा, तो तू गोरा कैसे हो सकता है , यह बता "
"वह छोड़ो , यह सुनो , इसमें कोई बड़ी बात नहीं है  Michael Jackson जैसे |"
मेरे मित्र ने कहा -"लेकिन, इसमें Physics कहाँ से आ गया "
उसने हमसे सवाल किया - "तुम्हे पता है आसमान का रंग नीला क्यूँ होता है ? हाथी का रंग काला क्यूँ होता है ?"
"हमें तो पता नहीं तुम बताओ "
"क्यूंकि पानी का रंग नीला होता है "
"मुझे तो रंगहीन पता था , I mean colorless  "
खैर , बहुत सारे Optics के laws  औरFrequency, wavelength और Rayleigh scattering  समझाने के बाद विकट बुद्धि समझ गया की आसमान नीला क्यूँ होता है  - 
उसने बोला -"यह ज़वाब तो समझदार लोग के लिए है , लेकिन एक आम आदमी को कैसे समझाओगे, उसको बोलना क्यूंकि पानी का रंग नीला होता है , इसीलिए आसमान नीला होता है "
"गयी भैंस पानी में " मेरे एक मित्र ने निरुत्तर हो कर कहा|

उसने तपाक से सवाल पुछा -"भैंस का रंग काला क्यूँ होता है "
मैंने ज़वाब दिया - "वो तो पता नहीं पर एक नीला सियार ज़रूर दिखा आज हमें "
मेरे मित्र ने छेड़ा -"काला कोई रंग नहीं होता है , यह सिर्फ रंग अभाव है (Black is technically not a colour, merely an absence of colour.)"
"क्या बात कर रहे हो , ऐसा थोड़े ही होता है , मुझे भैंस दिखता है "

हम सब माथापच्ची से बच कर अपने अपने काम में वापस जाने ही वाले थे , की सूर्यास्त का समय हो गया और सारा आकाश लाल और नारंगी के रंगों में सरोबार हो गया  |
यह देख कर मैंने उसे बोला - "ऊपर देखो नीला आकाश !"
वह झेंप गया परन्तु उसने कहा - "SHIT !"
हम सब ने कहा - "That's Yellow in color, क्यूँ |" :)

-© 2011 सत्य घटना पर आधारित